लॉकडाउन में पड़ोसन को गर्लफ्रेन्ड बनाकर चोदा — Hindi audio kahani
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लॉकडाउन में पड़ोसन को गर्लफ्रेन्ड बनाकर चोदा

Adhuri hasrat

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कहानी के बारे में

रोमांस सेक्स कहानी में मेरे घर के सामने रहने वाली लड़की को देखने पर उसके बारे में सेक्स भरे ख्याल आने लगे. वह भी मुझे देखते हुए देखती तो देखत...

📖 Padho — Poori Kahani

रोमांस सेक्स कहानी में मेरे घर के सामने रहने वाली लड़की को देखने पर उसके बारे में सेक्स भरे ख्याल आने लगे. वह भी मुझे देखते हुए देखती तो देखती ही रहती. लॉकडाउन की अधूरी हसरत और प्रीति की चुदाई दोस्तो, मेरा नाम नीरज है और मैं दिल्ली में रहता हूँ। यह कहानी दिसंबर 2020, लॉकडाउन के समय की है और यह पूरी तरह से एक रियल स्टोरी है, जो मैं आपसे शेयर करने जा रहा हूँ। यह सब मेरे और मेरे पड़ोस में रहने वाली एक सुंदर लड़की के बीच हुआ! अपनी असली रोमांस सेक्स कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने और अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताना चाहूँगा। मैं अपना और अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड का असली नाम नहीं बता सकता तो आप मुझे नीरज के नाम से इस कहानी में जानेंगे और मेरी गर्लफ्रेंड को प्रीति के नाम से। यह कहानी दिसंबर 2020 से शुरू होती है, जब मेरी उम्र 21 थी और प्रीति की 27 साल। 2020 में COVID की वजह से दिल्ली में लॉकडाउन जारी था। मैं अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहता हूँ। लॉकडाउन होने की वजह से देर रात तक फिल्में और वेब सीरीज देखना चलता था। मैं अक्सर सुबह देर से उठता था और बालकनी में खड़े होकर ब्रश करते हुए आस-पास देखता था। तभी मेरा ध्यान सामने वाले घर पे गया, जहाँ एक सुंदर सी लड़की दिखी। यह सिलसिला 2-3 दिन तक चला। सुबह वह अपनी बालकनी में कभी धूप सेकते, तो कभी कपड़े सुखाते हुए दिख जाती थी। दिसंबर में दिल्ली में बहुत ठंड होती है तो वह अक्सर 10-11 बजे बालकनी में कुर्सी लगाकर धूप सेकती हुई दिखती थी। हालाँकि, मैं उसको पहले से जानता था, कभी घर पे आना-जाना या फंक्शन में मिलना भी होता था। मैं हमेशा उसको ‘दीदी’ के रूप में देखता था क्योंकि वह उम्र में मुझसे काफी बड़ी थी। लेकिन पता नहीं क्यों, जब उसको देखना शुरू किया तो मन में सेक्स के ख्याल आने लगे। पर यह उम्मीद नहीं थी कि सच में इसको चोदने की किस्मत है मेरी! दिसंबर के अंत में मेरे परिवार ने एक बड़ा घर लेने का फैसला किया और शिफ्टिंग की तैयारी शुरू होने वाली थी। उसके कुछ दिनों पहले से ही मैं सुबह, दोपहर, शाम और रात को जब भी मौका मिलता, मेरी नजर उसकी बालकनी पर जमी रहती थी। मेरे दिमाग में यह था कि अब जब यहाँ से जाना ही है, तो इसे अच्छे से देख लूँ। कुछ दिनों बाद मुझे महसूस हुआ कि वह भी मुझे देखती है और जब मैं उससे नजर मिलाता तो वह दूसरी ओर देखने लगती! यह सिलसि...