कोरोना काल में कुँवारे लंड का सहारा — Hindi audio kahani
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कोरोना काल में कुँवारे लंड का सहारा

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कहानी के बारे में

वर्जिन बॉय फर्स्ट सेक्स कहानी में कोरोना लॉकडाउन में मैं किराये के कमरे में एक अन्य किराएदार लड़के के साथ फंस गयी. मनोरंजन के नाम पर मैंने दो...

📖 Padho — Poori Kahani

वर्जिन बॉय फर्स्ट सेक्स कहानी में कोरोना लॉकडाउन में मैं किराये के कमरे में एक अन्य किराएदार लड़के के साथ फंस गयी. मनोरंजन के नाम पर मैंने दो लड़कों के साथ चुदाई का मजा लिया. दोस्तो, आज मैं अपनी इस सेक्स कहानी में अपनी चुदाई की गर्म कथा सुना रही हूँ. यह एक अकेली लड़की की दास्तान है कि उसे अकेले रह कर क्या-क्या करना पड़ सकता है. मैं आपको अपने बीते कोरोना काल की बहुत ही मजेदार घटना बताने जा रही हूँ. यह वर्जिन बॉय फर्स्ट सेक्स कहानी कोरोना के पहले हमले वाले समय की है, उस वक्त मैं आम भारतवासी के जैसे इंदौर में फंस चुकी थी. मुझे घर जाने का समय ही नहीं मिला और मैं एक अकेली लड़की थी, कुछ नहीं कर सकती थी. मैं जिस घर में रहती थी, उसके बाजू वाले कमरे में एक लड़का किराए पर रहता था. वह बहुत अच्छा, हैंडसम और नेचर से भी बहुत अच्छा था. वह उम्र में मुझसे छोटा था. वह मेरे मामा के गांव का था, जहां मैंने अपना बचपन बिताया था. उसका नाम कपिल था. वह मुझे दीदी कहता था. हम दोनों कोरोना में फंस गए थे, घर जा नहीं पाए थे. वह उम्र में 19 साल का जरूर था लेकिन शरीर से मस्त जवान और हट्टा-कट्टा सांड जैसा था. इसके बाद भी मैं कहूँगी कि उसका शरीर जरूर मर्दाना हो गया था लेकिन उसका दिमाग उम्र के हिसाब से ही था. मैं उससे 3 साल बड़ी थी. पहले मैं उसे मैथ पढ़ाया करती थी. उन दिनों मेरा राशन खत्म हो चुका था लेकिन उसके पास काफी दिनों तक चल सकने वाला राशन रखा था. इसी वजह से उसने मेरी मदद की. अब मैं उसके यहां जाती, खाना बनाती, खुद खाती और उसे भी खिलाती. सच में वह बहुत अच्छा लड़का था. दो दिन बाद मकान मालिक का लड़का, जो पुणे में जॉब करता था, वह घर वापस आ गया. उसे क्वारंटाइन होना था. घर में जगह नहीं थी. अंकल ने दुर्भाग्य से मेरे ही कमरे को खाली करने को कहा. हालांकि वे बहुत अच्छे आदमी थे, लेकिन समस्या ऐसी थी कि मैं उन्हें मना ही नहीं कर सकी. अब मेरा जरूरी सामान बस बाजू वाले कमरे में रख दिया गया. मतलब अब हम दोनों साथ में रहने वाले थे और मेन बात ये कि एक ही गद्दा, एक ही ओढ़ने वाली चादर … अब कुछ नहीं, बस किसी तरह से एडजस्ट करना था. मेरी रात को शॉर्ट्स पहनकर सोने की आदत थी लेकिन आज मैं झिझक रही थी. मगर किस्मत जो लिखा रहता है, वही होता है. शाम को खाना खाया और हम लोग लेट गए. पहले तो वह बोला- मैं अलग सो जाता हूँ. मैंने कहा- क...