गांव की माल सरीखी चाची को चोद दिया — Hindi audio kahani
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गांव की माल सरीखी चाची को चोद दिया

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कहानी के बारे में

गांव की माल सरीखी चाची को चोद दिया चाची Xxx सेक्स कहानी में मेरे पड़ोस में एक सेक्सी माल चाची रहती हैं. गाँव के लौंडे उन्हें चोदने की फ़िराक म...

📖 Padho — Poori Kahani

गांव की माल सरीखी चाची को चोद दिया चाची Xxx सेक्स कहानी में मेरे पड़ोस में एक सेक्सी माल चाची रहती हैं. गाँव के लौंडे उन्हें चोदने की फ़िराक में थे. मैं भी उन्हें लाइन मारने लगा. वे मुस्कुराने लगी. मेरा नाम अमरेन्द्र है. मैं बिहार के सिवान जिले का रहने वाला हूँ. आज जो सेक्स कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वह मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली सबिता चाची की है. इस चाची Xxx सेक्स कहानी में सिर्फ़ नाम काल्पनिक हैं, बाकी सब कुछ बिल्कुल वास्तविक है. मेरी उम्र 26 साल है और हाइट 5 फीट 5 इंच. सबिता चाची की उम्र 35 साल है. वे खुलते गोरे कहूँ या हल्के सांवले रंग की कहूँ … पर बड़ी मस्त माल हैं. चाची का कद पांच फीट एक इंच है और फिगर 34-30-36 का कमाल का है. उनके पीछे मुहल्ले के दो जवान मर्द और तीन जवान लड़के हमेशा पड़े रहते थे. इस कहानी की शुरुआत उन्हीं पीछे पड़े लोगों की बातों से हुई. सर्दियों का समय था. वे पांचों आग जलाकर हाथ सेंक रहे थे. मैं भी आग का मज़ा लेने वहां पहुंच गया. वहां सबिता चाची की जवानी और उनके गदराए हुए बदन की बात चल रही थी. वे सब यही बोल रहे थे कि किसी तरह वह माल पट जाए, तो उसकी जवानी का मज़ा लिया जा सके. उन सबकी बातें सुनकर मेरे अन्दर भी उन्हें चोदने की लालसा जागने लगी. मैं तो मुहल्ले का बहुत शरीफ लड़का माना जाता था. लेकिन उसके बाद मेरा उन्हें देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया. कमाल तो तब हुआ जब चाची ने भी इसमें पूरा सहयोग दिया. मैं उन्हें आते जाते देखने लगा था. औरतों को शायद यह वरदान है कि वे मर्दों की नजरों से ही समझ लेती हैं कि वह उनके बारे में क्या सोच रहा है. चाची ने भी मेरी पिपासु नजरों को देख कर समझ लिया था कि मैं उन्हें चुदाई की दृष्टि से देखता हूँ. गांव में हम सब आपस में एक दूसरे को भली भांति जानते हैं और बात करने में कोई गुरेज भी नहीं करते हैं. इसलिए चाची मुझे देख कर हल्की सी स्माइल करने लगी थीं. उनकी स्माइल देख कर मुझे अच्छा तो लगता था लेकिन गांड फट जाती थी कि ये क्यों मुस्कुराईं. इस तरह से वे खुद धीरे-धीरे मेरे नज़दीक आने लगी थीं. लेकिन मेरी हिम्मत आगे बढ़ने की जरा सी भी न होती थी. एक दिन मैं अपने दरवाजे पर खाट बिछा कर उस पर बैठा था. सबिता चाची मेरे द्वारे से होती हुई खेत की तरफ़ जा रही थीं. जैसे ही वे मुझे घूरती हुई सामने से गुज़रीं, अचानक मेरी आंख क...