मेरी मां का गैंगबैंग: सेडक्शन की पूरी कहानी(Meri maa ka gangbang: seduction ki poori kahani) — Hindi audio kahani
College

मेरी मां का गैंगबैंग: सेडक्शन की पूरी कहानी(Meri maa ka gangbang: seduction ki poori kahani)

Pyaar aur junoon

0:00 0:00
Speed:

कहानी के बारे में

मेरा नाम राहुल है। मैं 19 साल का हूं। घर में सिर्फ मैं और मेरी मां रीता हैं। पापा की मौत को दो साल हो गए। मां 39 साल की है, लेकिन उसका बदन 3...

📖 Padho — Poori Kahani

मेरा नाम राहुल है। मैं 19 साल का हूं। घर में सिर्फ मैं और मेरी मां रीता हैं। पापा की मौत को दो साल हो गए। मां 39 साल की है, लेकिन उसका बदन 30 साल वाली लड़की जैसा है। लंबे काले बाल, बड़ी भूरी आंखें, गोरा रंग, पतली कमर, भरी छाती और गोल गांड। वह हमेशा साड़ी पहनती है, जो उसके शरीर से चिपक कर सब कुछ दिखा देती है। मां घर का सारा काम खुद करती है, लेकिन रातों में मैंने सुना है कि वह अकेले में खुद को छूती है। मुझे लगता था कि मां की चाहतें बहुत हैं, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि वह इतनी बहकी हुई हो सकती है। एक रात मैं दोस्तों के साथ देर तक घूमने गया था। रात के 11 बज चुके थे जब मैं घर लौटा। बाहर दो कारें खड़ी थी। मैंने सोचा, कौन आया है? चुपके से दरवाजे की झिरी से झांका। अंदर चार आदमी थे। वे मजबूत कद के थे, शायद पड़ोस के ठेकेदार। नाम थे राजू, मुनू, बबलू और सोहन। मां उन्हें चाय परोस रही थी। वह लाल साड़ी में थी, पल्लू थोड़ा ढीला। “अरे भाई साहब, इतनी रात गए?” मां ने मुस्कुराते हुए कहा। लेकिन उसकी आंखों में कुछ चमक थी। राजू ने चाय का घूंट लिया और बोला, “रीता जी, आपका घर का काम आज खत्म हो गया। ये पैसे लीजिए।” मां ने पैसे लिए, लेकिन उसका हाथ राजू के हाथ पर रुका। राजू ने मुस्कुराया। “क्या जल्दी है? थोड़ी देर और रुक जाओ ना।” मां बोली। लेकिन अब सेडक्शन की शुरुआत हो चुकी थी। राजू ने मां की आंखों में देखा। “रीता जी, आप अकेली हैं ना? ये घर इतना बड़ा, और आप इतनी सुंदर।” उसकी आवाज गहरी थी। मां शर्मा गई, लेकिन नज़रें मिलाई। “हां, अकेलापन सताता है।” बोली। मुनू ने हंसते हुए कहा, “अरे रीता जी, आप तो फिल्मी हीरोइन लगती हैं। ये साड़ी आपके बदन पर कितनी अच्छी लग रही।” वह सोफे से उठा और मां के पास गया। मां ने चाय का कप रखा। मुनू ने मां के कंधे पर हल्का हाथ रखा। “गर्मी लग रही है क्या? पल्लू ठीक कर लो।” बोला, लेकिन हाथ से पल्लू को छुआ। मां का पल्लू सरक गया, ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा दिखा, छाती का गोलाई साफ। मां ने हंस कर पल्लू ठीक किया, लेकिन जान-बूझ कर धीरे। “तुम लोग कितने शरारती हो।” बोली। बबलू ने कहा, “रीता जी, हम तो आपके दीवाने हो गए। ये आंखें, ये होंठ।” वह मां के चेहरे के पास आया, सांस छुई। मां की सांस तेज हो गई। सोहन ने टीवी ऑन किया। कोई रोमांटिक गाना बजने लगा। “रीता जी, थोड़ा नाच लो ना। हम देखें।” बोला।...