कहानी के बारे में
नमस्कार दोस्तों, कैसे हो आप सब लोग? उम्मीद करता हूं आप सब लोग एक-दम अच्छे होंगे। मेरा नाम प्रतीक है। मैं बिहार से बहुत छोटे गांव से आया हूं।...
नमस्कार दोस्तों, कैसे हो आप सब लोग? उम्मीद करता हूं आप सब लोग एक-दम अच्छे होंगे। मेरा नाम प्रतीक है। मैं बिहार से बहुत छोटे गांव से आया हूं। दरअसल मेरे पिता जी के गुज़र जाने के बाद सारा घर का बोझ मेरे और मेरी माँ के कंधों पर आ गया। जिसकी वजह से मुझे पढ़ाई को बीच में ही छोड़ना पड़ा। मैं गांव में काफी नौकरी पाने का प्रयास किया, मगर मेरी शिक्षा के कारण मुझे नौकरी नहीं मिल रही थी, और मिल भी रही थी तो उससे गुज़ारा करना बहुत मुश्किल हो रहा था। हम लोग काफी गरीब थे। मैं किसी जानने वाले से बात किया और उसने मुझे दिल्ली में किसी का परिचय करवाया। वह हमारे गांव का ही लड़का था। बचपन में हमारे साथ खेल भी करता था। मगर पिछले 14 सालों से दिल्ली में था। मैंने उससे बात किया। उसका एक कारखाना था। उसने मुझे कहा: ठीक है, तुम यहां पर आ जाओ। मैं तुम्हें कम पर लगवा दूंगा। मैं अगले ही दिन में ट्रेन में चढ़ कर अपने घर से दिल्ली की ओर रवाना हो गया। उसने मुझे एड्रेस बताया था। मैं पूछता-पूछता उस एड्रेस तक जा पहुंचा। छोटा सा फोन था मेरे पास। मैंने उन्हें फोन किया। वह बाहर आए। उसका नाम अमित था। देखने में ठीक-ठाक था। उसने मुझसे हाथ मिलाया और कहा: तुम क्या-क्या काम कर लेते हो? मैंने कहा: मैं कोई भी काम करने के लिए तैयार हूं। उसने कहा: ठीक है, मैं तुम्हें हमारे कारखाने में अभी हेल्पर के रूप में रख लेता हूं। हमारी वेतन के बारे में भी बात-चीत हो गई थी। मैं बहुत ही मेहनती इंसान था। उसको मेरी मेहनत देख कर काफी ज्यादा खुशी हुई। वह मेरे साथ काफी घुल मिल गया था। अब हमारे बीच में मालिक और नौकर का बर्ताव नहीं रह कर बल्कि दोस्त का व्यवहार रहने लगा था। अमित की शादी हो चुकी थी। उसकी उम्र करीब 28 साल थी, और मैं करीब 23 साल का था। हमारे बीच में 5 साल का अंतर था। अमित अपने घर मुझे एक बार लेकर गया था। उसके घर पर उसकी एक बहुत ही सुंदर सी बीवी थी, जिसका नाम अमृता था। जब मैंने उसे पहली बार देखा था, तब मैं देखता ही रह गया था। खैर जब भी वह गांव आती थी, तो अपना मुंह ढक कर रखती थी। लेकिन जब इस बार मैं उससे मिला तो उसका वह गोरा चेहरा मेरे दिमाग से निकाले नहीं निकल रहा था। वह बहुत ज्यादा गोरी और बहुत सुंदर थी। उसके उभार बहुत ज्यादा नहीं थे। मगर पूरे शरीर की बनावट किसी कामदेवी जैसी लग रही थी। चूतड़ एक दम बाहर की ओर थे। भगवन ने...