अंधेरे हॉल की गर्मी-1(Andhere hall ki garmi-1) — Hindi audio kahani
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अंधेरे हॉल की गर्मी-1(Andhere hall ki garmi-1)

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कहानी के बारे में

“अंधेरे हॉल की गर्मी” मेरा नाम रिया है। उम्र 22 साल। मैं पटना के पास एक छोटे शहर में रहती हूं। मेरी बड़ी दीदी का शादी हुए दो साल हो गए। जीजू...

📖 Padho — Poori Kahani

“अंधेरे हॉल की गर्मी” मेरा नाम रिया है। उम्र 22 साल। मैं पटना के पास एक छोटे शहर में रहती हूं। मेरी बड़ी दीदी का शादी हुए दो साल हो गए। जीजू (दीदी के पति) का नाम अजय है — उम्र 30 साल, लंबा, गोरा, जिम जाने वाला बॉडी, और बातों में बहुत शरारती। दीदी अक्सर कहती, “अजय बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी बहुत शरारत करता है।” एक दिन दीदी ने कहा, “रिया, आज शाम को फिल्म देखने चलें? नई मूवी आई है, रोमांटिक-थ्रिलर। अजय टिकट ले आएगा।” मैं खुश हो गई। लंबे समय बाद बाहर घूमने का मौका। शाम को हम तीनों सिनेमा हॉल पहुँचे। हॉल पुराना था, लेकिन अच्छा खासा भरा हुआ। बैक बेंच में तीन सीटें मिली — जीजू बीच में, दीदी बाईं तरफ, मैं दाईं तरफ। लाइट्स ऑफ हुईं, फिल्म शुरू हुई। पहले 20-25 मिनट तो सब नॉर्मल था। लेकिन फिल्म में एक रोमांटिक सीन आया — हीरो-हीरोइन पास आए, किस्स करने लगे। जीजू ने धीरे से मेरी तरफ देखा। मैंने नोटिस किया, लेकिन कुछ नहीं कहा। फिर जीजू ने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया। मैं चौंक गई। दीदी उस तरफ देख रही थी, फिल्म में खोई हुई। जीजू ने फुसफुसाया, “रिया… शांत रहना… बस थोड़ा मजा।” मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने कस कर पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ मेरी सलवार के ऊपर से धीरे-धीरे सहलाने लगी। जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर… हल्का-हल्का दबाव। मैं सिहर गई। “जीजू… मत करो… दीदी…” मैंने कान में कहा। जीजू मुस्कुराए, “दीदी सो गई हैं। देख, फिल्म में कितना मज़ा आ रहा है। तुझे भी आएगा।” उनका हाथ अब और ऊपर सरक रहा था। सलवार के नाड़े के पास। मैंने पैर बंद करने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने अपना पैर मेरे पैर पर रख दिया। अब उनका हाथ मेरी चूत के ठीक ऊपर था — कपड़े के ऊपर से दबा रहे थे। गर्माहट महसूस हो रही थी। मेरा शरीर गर्म होने लगा। फिल्म का सीन और गर्म हो गया। जीजू ने मेरी सलवार की नाड़ी खोल दी। मैं घबरा गई, लेकिन रोक नहीं पाई। उनका हाथ अंदर चला गया। पैंटी पर उँगलियाँ फिराईं। मैंने आँखें बंद कर ली। जीजू ने पैंटी साइड से सरकाई और सीधे चूत पर उँगली फेरनी शुरू की। “उफ्फ… रिया… कितनी गीली हो गई है तू…” जीजू फुसफुसाए। मैं काँप रही थी। क्लिट पर उँगली घुमा रहे थे। धीरे-धीरे अंदर एक उंगली डाल दी। मैंने होंठ काट लिए, आह न निकले इसलिए। जीजू ने दूसरी उंगली भी डाली। अब अंदर-बाहर कर रहे थे। मेर...